2021 - Basant panchmi / बसंत पंचमी कब है और क्यों मनाई जाती है
बसंत पंचमी – Basant Panchami एक हिन्दू का त्योहार है, हिन्दू पंचांग के अनुसार ये त्यौहार हर साल माघ मास शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है, बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह त्यौहार देवी सरस्वती को समर्पित है
माँ सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है अतः सभी पढने वाले विद्यार्थी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते है और अपने उपकरणों की पूजा के साथ मां सरस्वती की वंदना करते हैं वहीं कलाकारों में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है गायक, कवि, लेखक, वादक, नृत्यकार, नाटककार अपने उपकरणों की पूजा के साथ मां सरस्वती की वंदना करते हैं
मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि और ज्ञान बढ़ता है बसंत पंचमी के दिन स्नान का भी खास महत्व माना जाता है
बसंत पंचमी – Basant Panchami
जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों पर फूल चमकने लगता है मानो हर जगह सोना बिखेर दिया गया हो और जौ, गेहूँ की बालियाँ आ जाती है तब बसंत पंचमी का त्योहार आता है
लोग पीले खाते हैं और पीला पहनते हैं। राजस्थान में, लोग चमेली की माला पहनते हैं, जबकि उत्तराखंड में लोग भगवान शिव और पार्वती को भी धरती माता मानते हैं
सिख पीले रंग का त्योहार मनाने के लिए लंगर का आयोजन करते हैं यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है
बसंत पंचमी को मां सरस्वती की पूजा क्यों की जाती है
माना जाता है जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी तब हर तरफ शांति व्याप्त थी कही भी कोई ध्वनि सुनाई नहीं पड़ रही थी तो उस समय भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने कमंडल से जल लेकर धरती पर छिड़का तो एक अदभुत शक्ति एवं चतुर्भुज हाथों वाली नारी का अवतार हुआ
जिनके हाथों में वीणा, माला, पुस्तक थी और जब उन्होंने ब्रह्माजी के कहने पर वीणा बजाई तो हर तरफ संसार मे ध्वनि फैल गई तब ब्रह्माजी ने वीणा की देवी को सरस्वती के नाम से पुकारा, इसी कारण इस दिन को माँ सरस्वती की पूजा की जाती है
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